Tuesday, August 11, 2015

नगनता

नग्न होने पर
कोई भी
किसी व्यक्ति को
नहीं देखता
जो चीथड़े
बचे उसके तन पर
प्रत्येक व्यक्ति
उनको भी उघेड़ता
करके पूर्णत:
निर्वस्त्र
हास्य व्यंग्यों से
भेदते हैं
अंतर्मन में
लुप्त आत्मा को भी
निर्वस्त्र करने का
प्रयत्न करते हैं ,
पर जो व्यक्ति
नग्न होकर भी
इस त्र्षणकु समाज को
निर्वस्त्र करता है
उसी का इस
कलुषित समाज में
वर्चस्व होता है
सम्पूर्ण समाज
उसे ही आदर सूचक
शब्दों से
सम्बोधित करता है
वहीं आज मेरे देश में
सम्मानित व्यक्ति या
समाज का
ठेकेदार होता है |



Thursday, June 11, 2015

लड़की की शादी ,और दहेज़ की व्यवस्था के कुपरिणाम

क्या कभी आपने या देश की किसी भी सरकार ने सोचा है कि बेटी की शादी करने के लिए दहेज़ एकत्रित करने हेतु बेटी के अभिभावकों को क्या क्या सहन करना और सुन्ना  पड़ता है ,|
अब चाहे गाँव हो या शहर अथवा टाउन सभी जगह एक जैसी दशा है ,
जैसे ही  बेटी  १६ या  १८ की आयु को पार करती है तो माँ बापू को  पता नहीं चलता कि कि उनकी बेटी  शादी लायक हो गई है क्योँकि वो उसे पढ़ा लिखकर उसका कर्रिएर बनाना चाहते है ,वैसे भी उनको अपनी बेटी बच्चा ही नजर आती है जब तक कि वो मेचौर ना हो  जाए और घर बार संभालने के काबिल ना हो जाए ,या अभी उनके पास यथायोग्य धन न्नहीं होता  दहेज़  देने के लिए क्योँकि अभी तो वो पढ़ाई लिखाई करने में ही काफी धन लगा चुके होते हैं ,परन्तु मजे कि बात ये है कि आपके अड़ोसी पड़ौसियों और रिश्तेदारों  पहले पता चल जाता हैं कि उसकी बेटी युवा हो गई है ,और फिर वो अभिभावकों को टॉर्चेर करना भी शुरू कर देते हैं ,और ऐसे भोले बनकर कहते हैं ,भाई  साहब आपकी बेटी शादी लायक  हो गयी है कब कर रहे हो ,जैसे  कि पूरे दहेज देने का इंतजाम उन्होंने पहले ही  कर रखा हो और जब शादी ंहोगी तो 1000 खाकर टिकाएंगे १०१ रुपया ,,
  तो भाई इस  प्रकार कि बातों से तंग आकर बेटी के  अभिभावकों को क्या क्या करना  पड़ता है देखिये और कैसे कैसे परिणाम भोगने पड़ते हैं मात्र दहेज़ के कारण |
सबसे पहले तो जिस किसी भी व्यक्ति के पास बेटी कि शादी में दहेज़ देने के लिए पैसे कि कमी होती है तो मात्र इसी कारण से पुत्री कि आयु और जल्दी जल्दी बढ़ने लगती है जिसे देख देख और सोच सोचकर के उसके अभिभावक रात दिन चिन्तयुक्त होकर  प्रितिदिन और प्रितिरात  मरते रहते हैं |
दूसरा कारण कभी कभी पैसे कि तंगी के कारण उनको अपनी पुत्री कि शादी किसी ऐसे व्यक्ति से करनी पड़ती है जो कि किसी भी तरह से उसके उपयुक्त नहीं है जिसके कारण भी उनका मारना जीना प्रितिदिन चलता ही रहता है |आ
यदि ऐसा नहीं करते हैं तो समाज में तिरस्करित जीवन जीते हैं |
यदि कोई सरकारी नौकर है ऊर्फ उसके पास सही जुगाड़ पैसे का नहीं है तो वो किसी भी तरह धन कमाकर पुत्री कि शादी जल्द से जल्द करना चाहता है जिसके लिए उसे रिश्वत आदि लेकर भ्र्ष्टाचार करना पड़ता है ,यदि नहीं पकड़ा गया तो वाह वाह ,और पकड़ा गया गया तो जेल कि हवा खा ,शादी शुदी गई भाड़ में |
यदि व्यक्ति व्यापारी है और उसका व्यापार ठीक नहीं चल रहा है और पैसा नहीं है और इज्जतदार भी है तो पैसा मांगे किस्से ,और यदि पैसा माँगा तो इज्जत गई भाड़ में ,तो वो मजबूरी में दिवाला आदि निकालेगा या फिर आत्महत्या ही करेगा ,या फिर दूकान मकान बेचेगा ,उस वाली बात होगी कि धोबी का कुत्ता ना घर का ना घाट का ,अब और करे भी तो क्या |
और यदि पुत्री का बापू किसान है और आय को मुख्य स्रोत नहीं है तो बेचारा क्या नहायेगा और क्या निचोड़ेगा ,या तो साहूकार से ८ या १०% पर पैसा लाएगा और चूका नहीं पायेगा तो बेटी कि शादी तो हो जायेगी परन्तु वो बंधुआ बन जाएगा ,या फिर बैल भैंस कटिया ,खेत खलहान कुछ भी बेचेगा तो भी गई भैंस पानी में ,फिर उससे अच्छा है कि आत्महत्या ही करे |
और यदि किसी मजदूर की  बेटी है तो दिल पर पत्थर रख कर  किसी भी काले पीले ,बेवड़े,या नशेड़ी से शादी शुदी करके घर में चुप चाप बैठ जाएगाउसकी अपनी जिंदगी तोमखराब होगी ही साथ में लड़की जिंदगी तो नरक ही बनकर रह जाएगी ,यदिमवोम लड़की  की शादी न करता तो अड़ोसी पडोसी रिश्तेदार जीने ही नहीं देते ना उसको ना उसको ना उसकी बेटी को |
कहने का तातपर्य है कि समाज के डर मात्र से भी कितने ही शरीफ लोग बेटी कि शादी ना करने के कारण समय से पहले ही स्वर्गलोक सिधार जाते हैं ,जिसके कारण पीछे रह चुके और बच्चों या  जो उस पर आश्रित थे उनका जीवन भी खराब और वो फिर अपना पेट भरने हेतु क्राइम करना शुरू कर देते हैं |
और ये सभी बातें ,समाज और सरकार भी भली  भांति जानती है परन्तु शादी विवाह को मात्र REGISTRATION तक नहीं पहुंचती क्योंकि जो सरकार में हैं या बड़े बड़े नेता राजनेता हैं उनके पास तो देश का १५%रुपया है  इसलिए वो चाहे जितना पैसा खर्च कर सकते हैं ,इसलिए ना तो वो मरेंगे और नाहीं उनकी बेटियां आत्महत्या जैसा घिनौना कार्य करेंगे फिर वो परवाह करे भी तो क्योँ |
इसलिए यदि देश को और महिलाशक्ति को बचाना है और अगली पीढ़ी में वीर पढ़े लिखे होनहार युवक और युवतियां पैदा करनी हैं तो दहेज़ रुपी कोढ़ को देश से हटाना ही पडेगा ,वरना तो आगे आने वाला समाज विकृति वाला ही पैदा होगा ,क्योंकि जब बच्चा माँ के गर्भ में होता है और युवती को दहेज़ के लिए प्रताड़ित किया जाता है तो उसका असर गर्भस्थ शिशु पर भी पड़ता है |
मात्र एक शादी ना करने या जोड़तोड़ या क्राइम करके पैसा एकत्रित कर पूर्ण दहेज़ के रूपम में देने से क्राइम का ग्राफ बढ़ता जा रहा है परन्तु सरकार कम कान पर जू नहीं रेंगती |
अत:  हम सभी भारतीय जनता और सरकार को मिलकर दहेज़ रुपी कोढ़ को समाप्त करने हेतु पर्यटन करने चाहिए ,आज नहीं तो कलम सफलता अवश्य मिलेगी
                                                                                         धन्यवाद




























Monday, June 8, 2015

स्त्री का वर्चस्व पुरुष के समक्ष नगण्य क्योँ ?

स्त्री का वर्चस्व २१ वीं शताब्दी में भी पुरुष के समक्ष नगण्य है आखिर क्योँ ?
कोई भी पुरुष गरीब से गरीब और अमीर से अमीर ,बिना दहेज़ के किसी भी लड़की से विवाह करने को तैयार नहीं है क्योँ ?
यदि लड़का इंजीनियर ,I A S या I P S या I R S  है तो उनके रेट भी करोड़ों में तय हैं चाहे लड़की भी इन्हीं रैंक्स की क्योँ ना हो क्योँ ?
बहुत  सारा दहेज़ देने के बावजूद भी लड़की को पैर की जूती समझा जाता है क्योँ ?
दहेज़ लाने के बाद भी ससुराल में उससे नौकरों जैसा व्यवहार होता है  क्योँ ?
उनसे घर  का काम काज भी जानवरों की भाति लिया जाता है क्योँ ?
उनको ससुराल में प्रताड़ित किया जाता है क्योँ ?
आज देश में ९३ % स्त्री आत्महत्या के केस मात्र दहेज़ को लेकर होते हैं क्योँ ?
इस  सबके बावजूद आज तक देश में  दहेज़ रोकने का कानून  तो बना परन्तु उसको असली  जामा नहीं पहनाया गया क्योँ ?
क्योँकि जिन लोगों की सरकार है या जो सरकारी पिट्ठू हैं उनके पास अथाह धन है और वो अपनी बेटियों की शादी में अचूक धन व्यय करते हैं ,उनके लिए गरीब कन्या या स्त्रियों का कोई महत्त्व नहीं है ,
यदि ये ऐसे ही चलता तो वो दिन दूर नहीं है जब की हर घर के बेटी को आत्नहत्या का सामना करना पडेगा क्योँकि आप चाहे कितना ही दहेज़ दे दो परन्तु उन दुर्जनों का पेट नहीं भरता |
कायदे से तो न्याय प्र्णाली के तहत शादी मात्र रजिस्ट्रेशन से हो जानी चाहिए ,फिर देखिये देश कैसे उन्नति करता है
क्योंकि आधी जिंदगी तो व्यकि की चाहे वो व्यापारी हो या किसान अथवा सरकारी नौकर या साधारण व्यक्ति ही क्योँ न हो अपने बच्चों की शादी के लिए धन एकत्रित करने में ही लग जाता है ,फिर वो तरक्की क्या करेगा खाक ,वो सिसकता ही रहता है |






Wednesday, May 27, 2015

पत्नी रुपी प्राणी

एक पत्नी रुपी प्राणी ही तो है
जो अपने वर्ण करने वाले पति को
अपना सब कुछ अर्पित करने के बाद भी
उसे अपना पति परमेश्वर कहती है ,
और स्वयं को उसकी सेविका मान
स्वयं के मान  सम्मान को ताक पे रख
उसके बच्चों की माँ बनकर भी
 धर्मपत्नी कहलाने पर गर्वित होती है ,
यदि पति उसके साथ किसी भी प्रकार का
शारीरिक ,मानसिक शोषण करता है
तो उसे अपना अहो भाग्य समझकर
प्रभु से उसकी दीर्घायु कामना करती है ,
यदि  पति फिर भी नहीं समझता तो
उसे शनै शनै समझाने का यत्न करती है
यदि फिर भी नहीं समझता है तो
बच्चों के मोहवश ,दूरी बनाकर जीती है |

Saturday, May 23, 2015

आलोचना

आलोचना
 एक ऐसा
वाणी वाण है
जो ंबहुतं
धीरे धीरे
जख्म बनाता है और
वो जख्म एक दिन
नासूर बन जाता है
और आलोचक
सोचता है कि
आलोचना करना
मात्र उसी को आता है
बाकी सब जन
आलोचना के अरी हैं
मात्र वो स्वयं ही
उसका सगा भ्राता है
परन्तु जब वो
सोचनीय अवस्था से
जाग्रत अवस्था में
आता है तो
देखता है कि
वो जिसकी आलोचना
कर  रहा था
वो तो स्वस्थ्य और
सुदृढ़ है परन्तु
वो स्वयं नीचता को
प्राप्तं करके
समाज कि दृष्टि में
कमीना ,कंजर ,कुलच्छना
निम्न स्तर का
व्यक्तिं बन जाता है
और जो जख्म
दूसरों को देना चाहता था
उस जख्म का
स्वयं भागीदार
बन जाता है
फिर सम्पूर्ण जीवन
कीड़े मकोड़ों जैसा
जीवन यापन करता हुआ
अधोगति को प्राप्त कर
नरक कुण्ड में
समा जाता है |











Wednesday, April 1, 2015

एक अनोखी कहानी किन्तु सच पार्ट (१० )

उसके बाद जब सभी कार्य ठीक करा लिए गए तो फिर अपना पुराना काम शुरू कर दिया ,बच्चे सब धीरे धीरे काम करने लगे तब कहीं जाकर माली हालत कुछ ठीक होने लगी फिर जिन लोगों से थोड़ा बहुत पैसा उधार ले रखा था तो उनको हाथ  जोड़कर वापिस करने लगा और बैंक ब्याज भी साथ के साथ दिया जाने लगा ,इन सभी हालातों का बीच वाले को पता चल जाता था तो फिर उलटे काम करने लगता था ,जैसे की मुल्ला मौलवियों से टोन टोटके ,तंत्र मंत्र भी कराने लगा की किसी प्रकार बड़े के होते हुए सभी कार्य रुक जाएँ और मारन तंत्र का प्रयोग भी करने लगा जिसके कारण बड़ा बीमार रहने लगा ,और बीमारियां भी ऐसी की डॉक्टर्स को भी समझ नहीं आती थी फिर बड़े ने भी  कुछ लोगों को दिखाया तो उसके पैरों के नीचे से मिटटी ही निकल गई क्योँकि उसने तो बंगाली जादू ,मारन यत्र पता नहीं क्या क्या करा रहा था ,कुछ मौलवी ,सयाने प्रकांड पंडितों ने तो इलाज करने से ही मना कर दिया पर फिर एक बहुत पहुंचे हुए काली उपासक मिले उन्होंने किसी प्रकार से उसके टोन टोटकों से जान छुड़वाई ,फिर भी एक आँख में मोतिया बिन्द आ गया और टांगों में जान ही  नहीं रही
फिर आँख का इलाज कराया ,और टांगों का इलाज भी चलने लगा धीरे धीरे आराम आने लगा |
फिर उसने एक और FI R बड़े और उसकी पत्नी ,और साले एवं उसकी लड़की के नाम दर्ज कराने का भरसक पर्यटन किया परन्तु एक पुलिस अफसर को समझ आ गई की ये व्यक्ति इन सबको झूठे केस में फ़साना चाहता है अत: उसने F I R करने के लिए मना कर दिया ,फिर वो कोर्ट चला गया वहाँ जज ने भी पुलिस को रिपोर्ट बनाने के लिए कहा तो उसने भी बड़े के हक़ में ही रिपोर्ट दे दी ,फिर वो हाई कोर्ट चला गया ,वहाँ से भी केस वापस निचले कोर्ट भेज दिया ,तब वो कुछ शांत होकर बैठा ,
   परन्तु फिर भी बाज नहीं आया और उसने कुछ गुंडे बड़े के पीछे और बड़ी लड़की की गाडी के पीछे लगा दिए परन्तु कुछ दिन बाद पैसों के लेकर उसका उन बदमाशों से पंगा हो गया ,और उन्होंने बड़े की जान बख्श दी और बड़े से मिलकर बता भी दिया की उसका भाई उसे मरवाने के लिए उनको हायर किया था परन्तु कोईु पंगा हो गया इसलिए हम आपको कुछ भी नहीं कहेंगे वैसे भी उनको पता चल चुका था की बड़ा एक शरीफ आदमी है जिसके कारण उनका इंटरेस्ट खत्म हो गया |
फिर उसने एक दिन बड़े की गाडी का किसी ट्रक से एक्सीडेंट भी करा दिया परन्तु भगवन का करिश्मा की कहीं भी खरोच नहीं आई ,हाँ गाडी अवश्य टूट चुकी थी
अब जब बड़ा अपनी बेटियों की शादी करने के लिए किसी से मिलता और उसको  पता चल जाता तो वहाँ जाकर भी कुछ उल्टी उल्टी बातें करके रिश्ता तुड़वा देता ,मतलब कहने का तातपर्य है की उसने आखिर नीचता की हद ही पार कर दी ,अब एक शरीफ आदमी लड़ें भी तो कैसे लड़े ,उसने बड़े की और उसके बच्चों की जिंदगी खराब करके रख दी |

Saturday, March 28, 2015

एक अनोखी कहानी किन्तु सच्ची (पार्ट ९ )

उसके बाद बीच वाले ने अपने जान पहिचान के गुंडों से जेल के अंदर ही भरसक प्रयत्न किये परन्तु  बड़े को पिटवाने और ब्लेड लगवाने के लिए भरसक प्रयत्न किये परन्तु किसी न किसी के सहयोग से हर बार बच जाता था क्योँकि जेल में अपने अच्छे कार्यों और अपने अच्छे व्यवहार के कारण  सभी अफसर तथा कैदियों से उसकी अच्छी जान पहिचान हो गई थी ,बड़े को कवितायें लिखने और सम्मेलनों में कविता पढ़ने का शौक था ,इसी प्रकार के कवि सम्मलेन जेल में भी हर महीने एक दो बार हो जाते थे जिनमे बड़े की कविताएं सभी कैदी और अफसर बड़े ही दिल से सुनते थे क्योँकि वो सभी कविताएं कैदीयोंं,विचाराधीन कैदियों और अफसरों के ऊपर ही होती थी और कुछ अपने कारण खुद  के दुःख सुख की भी ,कहने का तातपर्य है की सभी लोग बड़े के मुरीद हो गए थे ,और जेल में रहकर क्षात्रो को पढ़ाना और समय समय पर उनकी सहायता कर देना या जेल में उनके लिए किये हुए सुधारों में अफसरों से मिलकर कुछ ना कुछ करा देना शामिल थे  ,और एक समय तो ऐसा आया कि जेल में रहने वाले बड़े बड़े ,और प्रसिद्ध कैदी भी उनके पास आयकर धोक करने लगे ,जिसके कारण फिर  कोई भी बड़े से पंगा लेना ही नहीं चाहता था ,बल्कि एक बार एक विचाराधीन कैदी ने बड़े से कुछ उलटा बोल दिया   फिर तो दसियों कैदी और अफसरों ने उसको इतना मारा की बड़े ने ही उसे छुड़ाया ,तब उसने भी उसके भाई का ही नाम लिया ,बड़ा अंदर रहकर बिना पढ़े लिखे कैदियों के केसेस की चाजर्शीट पढ़कर उनको समझाता था तो सभी प्रभावित थे ,वो बड़े की खूब सेवा करते जैसे  की मालिश  आदि  करना ,उनको खाना पानी laakar देना ,कपडे धो देना आदि आदि 

लगभग १६ माह जेल में रहने के बाद एक दिन जज साहब ने खुद ही बेल दे दी ,और फिर बड़ा घर वापस आ गया ,बड़ा बहुत रोया  था उस दिन उसे ऐसा लगा जैसे की नया जन्म मिला हो और उस दिन दुःख के कारण बड़े के भाइयों माँ बहन के घर रोटी भी नहीं पकी ,सम्पूर्ण परिवार दुखी हो गया किबड़ा जेल से छूटा क्योँ ?उसके बाद लगभग २ माह तक तो ऐसा लगा की जैसे उसके मस्तिष्क ने काम ही करना बंद कर दिया हो ,फिर कहीं नार्मल होने के बाद अपना काम काज देखना शुरू किया जो सबकुछ समाप्त हो चुका था उसको किसी प्रकार पटरी पर लाने की कोशिश करने लगा ,और जितने भी सेल्स टैक्स ,इनकम टैक्स D D A या M C D  के केसेस थे सबको सही कराता कराता वो लगभग टूट सा चुका था क्योँकि जितना भी पैसा घर में या पार्टीज से लेना था वो या तो खत्म हो चुका था अथवा कुछ मर चुका था ,या मुकदद्मों में वकील आदियों को देने में काम आ चुका था ,पर ईश्वर की कृपा से पैसे की जरूरत भी पूरी होती जा रही थी कॉिम ना कोई हेल्प कर ही देता था ,
पिछले  दो वर्षों में बैंक ब्याज काफी हो चुका था ,अत; बैंक वालों ने मकान की नीलामी की घोषणा कर दी ये बात बीच वाले को पता थी क्योँकि उसी ने बैंकर्स को ऐसा करने के लिए प्रेरित किया था वरना वो कुछ भी नहीं कह रहे थे वो कह रहे थे की आराम से थोड़ा थोड़ा देते रहो ,पर अचानक नीलामी की सुन बड़े के पैरों के नीचे से मिटटी निकल गई ,यानी की बनी बनाई इज्जत मिनटों में खत्म होने वाली थी परन्तु फिर एक मसीहा आ गया जिसने उस बैंकर्स को पैसे dekar नीलामी रुकवाई और फिर कही जान छूटी |