Friday, August 5, 2016

YATHARTH

दरअसल अमेरिका के भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन एक गरीब और मोची परिवार से थे ,जब उनको  पहली बार सीनेट में भाषण देने के लिए बुलाया गया और वो भाषण देने को खड़े हुए ,अभी पहला वाक्य ही बोला था की एक सज्जन खड़े हुए और बोले ,अबे ओ मोची के ,और जिस आदमी ने बोला तो सीनेट में मौजूद सभी व्यक्तियों की गर्दन और आँखें उस व्यक्ति की और मुड़  गईऔर सभी ने उस व्यक्ति को लगभग घूरते हुए देखा ,परन्तु लिंकन साहब ने सभी मौजूद व्यक्तियों को कहा कि आप सभी बैठ जाइये और उन साहब को बोलने दीजिये ,जो कुछ भी वो कहना चाहते हैं ,वो बहुत अच्छे और नेक व्यक्ति है और एक सत्यवादी इंसान भी ,उन्होंने जो भी कुछ अभी बोला "वो वास्तव में सत्य है " वास्तव में मैं एक मोची का ही बेटा हूँ इस बात के लिए उस पर गुस्सा मत   कीजिये ,वास्तव में उन्होंने मुझे आइना दिखाया है ताकि मैं  कुछ  बनने के पश्चात अपनी ओकात ना भूल जाऊं
और इतना कहने के पश्चात उस व्यक्ति को लिंकन साहब ने अपने पास बुलाया और उसका धन्यवाद भी किया ,
बस ये ही बात ,ये ही सच्चाई , मौजूदा व्यक्तियों के दिल में घर कर गई और वोव्यक्ति उनका व्यवहार देखकर उसी दिन उनको चरणों में गिर गया और अपनी करतूत पर माफ़ी  मांगी ,और उसके बाद लिंकन साहब अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए ।
तो कहने का तातपर्य है भाई हम लोगों में सच्चाई सुनने की आदत होनी चाहिए, मुंह ना मोड़ें ,हमको लिंकन साहब जैसे महानुभावों  के विचारों से कुछ सीखने चाहिए ,तभी हम लोग उन्नति कर सकते हैं
पर हमारे देश के नेताओं में ये सब कुछ कहाँ वो तो नेता बनते ही हवा में उड़ने लगते हैं, जाति तक बदल लेते हैं इंसान को इंसान नहीं समझते, जनता पर अत्याचार करने लगते हैं ,जो मुंह में आया बक देते हैं ,


 

Monday, August 1, 2016

aalochnaa

यदि कोइ आपकी आलोचना करता है तो परेशान मत होइए बल्कि खुश होइए क्योँकि आप में कुछ तो है जो लोग आपकी आलोचना कर रहे हैं ,वरना " लोग तो मरे हुए कुत्ते को भी लात नहीं मारते ।"
यदि आज मोदी जी  आलोचना हो रही है तो कुछ ना कुछ तो उस व्यक्ति में या उसके व्यक्तित्व में जरूर है ।
और यदि कांग्रेस और भाजपा पार्टीस केजरीवाल जी की आलोचना करते हैं तो इससे भी यही ज्ञात होता है कि   केजरीवाल जी में कुछ ना कुछ तो है जो आज देश की सबसे बड़ी दोनों  पार्टीस आलोचना कर ,रही हैं या भयभीत हैं अपने भविष्य को लेकर ,वार्ना तो वही पहली बात वार्ना" लोग मरे कुते को भी लात नहीं मारते "

doshi koun

नोएडा के जिस परिवार के साथ शाहजहां पुर अर्ध रात्रि में जाते हुए जो दर्दनाक घटना घाटी क्या ? यदि ये परिवार दिन के उजाले में शाहजहां पुर जाता  तो क्या ये दर्दनाक घटना फिर भी घटती या नही,? मैं सभी फेस बुक मित्रों से पूछना चाहता हूँ ,क्या अर्ध  रात्रि में नोएडा से शाहजहां पुर जाना और वो भी २ स्त्रयां और एक लड़की को लेकर ,बिना किसी हथियार के और वो भी बुलंदशहर जैसे इलाके से गुजरना जहाँ दिन में भी इस प्रकार के अपराध घटित होते रहते हों ,जरा सोचिये इस सबके हेतु सबसे बड़ा दोषी कौन है ,
सपा सरकार
या पुलिस
अथवा ये जाने वाला परिवार

BEVAKOOFI OR AKLMNDEE KA ANTAR

एक बार एक खुले स्कूल में एक मास्टर जी बच्चों को पढ़ा रहे थे तो वो बच्चों को बोले "देखो मै  तुमको गधे से आदमी बनाता हूँ "परन्तु तुम फिर भी मुझे मानसम्मान तक नहीं देते ,
ये बात रास्ते में गधे के साथ जाते कुम्हार ने सुनी तो वो मास्टर जी के पास गया और बोला मास्टर जी आप गधों को आदमी बना देते हो कृपया आप मेरे इस गधे को भी आदमी बना दें तो आपकी मेहरबानी होगी ,
अब मास्टर जी समझ गए की इससे निपटना मुश्किल है क्योँकि ये  मेरी  मतलब ही नहीं समझ सका  इसका मतलब निपट बुद्धू है ,तो मास्टर जी ने कहा ,हाँ मैं इसे आदमी बना दूंगा आप इसे स्कूल में छोड़ जाओ
कुम्हार ने कहा की ठीक है पर ये तो बताओ कितना समय लगेगा इसको आदमी बनाने में ,
मास्टर जी बोले ६ महीने तो लग जायेंगे ,आप ६ महीने बाद आकर ले जाना ,
मास्टर जी ने उस गधे को तो बेच खाया
ठीक ६ महीने बाद कुम्हार ,मास्टर जी को  बोला मैं जो गधा दे  गया था क्या वो आदमी बन गया ,और कहाँ है ?
मास्टर जी बोले भाई वो तो पढ़लिखकर जज बन गया और दिल्ली के बीस हजारी कोर्ट में कमर नंबर २०१४ में लगा हुआ है ,वहां से  ले जाना ,
अब कुम्हार की तो ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा और जाते जाते जो दो चार सौ रूपये साथ लाया था वो मास्टर जी को गुरु दक्षिणा में दे गया
और अगले दिन बीस हजारी के कमरा नंबर २०१४ में पहुँच  गया तो अचम्भे  में  हो गया क्योँकि एक बड़ी सी मेज के सामने बड़ी सी कुर्सी पर उसका गधा जज बनकर बैठा था ,
परन्तु कुम्हार को ये बड़ा नागवार गुजरा कि सामने  खड़ा हुआ देखकर उस गधे जज ने उसे आँख उठाकर  देखने के बावजूद भी  ना सलाम और नाहीं बैठने तक को कहा ,तो उसे गुस्सा आ गया और बोले
अबे ओ गधे जज तुझे तेरे   इस बाप ने  एक गधे से जज  दिया और आज तू उसी को भूल गया बेशर्म
अब जज ने उसे बड़े गौर  से देखा जो बोले जा रहा था ,तो उसने मन ही  सोचा की यदि इसे कुछ उल्टा सीधा कहा  से पकड़वा दिया तो ,जो सामने खड़े होकर देख  रहे हैं वो उसके बारे में क्या सोचेंगे ,और जनता में जजों के प्रति गलत मेसेज जाएगा ,इसलिए उसने कुछ बुद्धि से काम लिया
जज साहब कुर्सी छोड़ कर खड़े हो गए और बोले पिताजी मैंने आपको देखा नहीं था आइये आप मेरे पास बेठिये और मैं  चाय पानी  मंगवाता हूँ चाय आदि पीकर कुम्हार बहुत खुश हुआ और बोला बेटा ऐसा मास्टर जी ने तुझे क्या पढ़ाया था जो तू निपट गधे से जज बन गया ,
बातों बातों में जज साहब ने गाँव  स्कूल के बारे में पूछ लिया और बोले पिताजी अब आप घर चले जाओ और कल को मास्टर जी को साथ लेकर आना मैं उनकी भी सेवा करनी चाहता हूँ
 कुम्हार बोला बेटा  ठीक है और अगले दिन वो मास्टर जी को लेकर कोर्ट में पहुँच गया ,मास्टर जी को काटो तो  खून नहीं क्योँकि मास्टर जी समझ गए कि आज तो इस कुम्हार के  बच्चे ने बुरे फंसा दिया ,अब जज तो छोड़ेगा नहीं ,
जज साहब ने जैसे ही मास्टर जी को और कुम्हार पिताजी  को देखा तो फिर कुर्सी छोड़कर खड़े हो गए और मास्टर जी को बोले मास्टर जी मेरे पास आओ और अपने चरण आगे बढाओ मैं उनको स्पर्श करना चाहता हूँ आखिर आपने मुझे ६ महीने में ही गधे से जज बनाकर इस कोर्ट में भेज  दिया ,आपकी प्रशंसा किन शब्दों में करूँ ,इतने होते ही मास्टर जी जज साहब  चरणों में लेट गए और बोले  साहब चरण तो  मुझे  आप अपने स्पर्श  करने दो यदि आपो जैसी समझदारी और पेसेंस मुझमे होता तो आज ये नोबत ना आती ,मुझे माफ़ कर दो सर जी ,आइंदा किसी कुम्हार को ऐसी बात नहीउं बोलूंगा , ये  नाटक जनता देखकर दंग थी ,तो जज साहब ने  मास्टर जी को   कहा की अब  आप सम्पूर्ण कहानी सबको सूना दो ,और मास्टर जी ने सविस्तार कहानी सूना दी ,
सभी लोग जहाँ मास्टर जी  भर्त्सना और कुम्हार की बेवकूफी की  चर्चा कर रहे थे वहीँ जज साहब की तारीफों के पुल बाँध  रहे रहे थे
के पी चौहान

Sunday, July 17, 2016

putriyan

हम लोग उसे
माँ, बहिन ,बेटी
देवी एवं लक्ष्मी
ना जाने क्या क्या कहते हैं
पर पत्नी बनाने के नाम पर
दहेज़ के रूप में
अपना मुंह मांगा मूल्य
ठोक  बजाकर
वसूलते हैं

taal talaiya

युग युगन्तरों से
 वर्तमान तक
मेरी महत्ता और महत्त्व
बरकरार है
किसी भी ग्राम के
निर्माण से पूर्व
मेरे नाम  का
मंथन किया जाता था कि
मुझे किस दिशा में
स्थापित करना है
वास्तुनुसार मेरा
उत्तर पूर्व में दिशा में
निर्माण किया जाता था
मेरे निर्माण से पूर्व
यज्ञ ,पूजा हवन
 वरुण देव को
आगमन हेतु
आवाहन किया जाता था
फिर वरुण देव मुझे
अपने रुद्रों से प्लावित कर
बार बार आने का और
प्लावित करने का
भरोसा देकर
गंतव्य को चले जाते हैं

फिर ग्राम देवता भी आकर
मुझे आदेश  देता था और
मेरा  धर्म कर्म सेवा का
उपदेश देता था
कहता था कि
इस ग्राम और संसार में
जितने भी जलचर ,नभचर
मानव और दानव
कीट पतंग पशु जीवित हैं
उनकी उस आवष्यकता को
 जिसके हेतु
भूलोक पर तुमको
स्थान दिया गया है
पूर्ण कर जीवन दान  देना है
और मैं अपने उस कर्तव्य
को निरंतर पूर्ण
करता चला आ रहा हूँ
यदि मैं ग्रीष्म में
 अपना अस्तित्व खो दूँ तो
ना जाने कितने
असाहय ,निरीह  जीव जन्तु
अपने  जीवन से
हाथ धो बैठेंगे
यानि कि असमय ही
 काल कवलित हो जाएंगे
परन्तु मैं अपने कर्तव्यों की
कदापि अवहेलना नहीं करता
और मरते दम  तक
सभी की सेवा शुश्रवा में
 लीन रहता हूँ और
अपने नाम के अनुसार
सदैव साफ़ रहता हूँ और
जो भी मेरे सम्पर्क में आता है
उसे भी साफ़ रखने का
भरसक प्रयत्न करता हूँ
 अब आप ही बताओ कि
मैं मौन धारण  किये हुए
 कौन हूँ ।



Friday, July 15, 2016

bhains

एक दिन में
और मेरे पिता श्री
 घुमते घुमते
पहुँच गए उस पैंठ में
जहाँ उनकी खरीद फरोख्त
प्रत्येक माह के
अंतिम रविवार को
हुआ करती थी
वहां बहुत सुन्दर सुन्दर
काली काली
अपने अभिभावकों या
पालनहारों के साथ
शायद घूमने या
या अपने  रूप स्वरूप का
प्रदर्शन करने अथवा
नया मालिकाना हक़
प्राप्त करने आया करती थी
अचानक पिता श्री को
एक काली कलूटी
नाटी  सुखी हुई सी
पर दिल आ गया
और उन्होंने उसका
नया अभिभावक बन्ने का
खिताब पाकर
अपने साथ लेकर
वापसी को प्रस्थान
कर दिया
जब घरोंदे पर पहुंचे तो
माता ने देखते ही
घर सर पर उठा लिया
और लगी पिता श्री को
लानत मलानत देने
पर उन्होंने भी
अपना सर नीचे को कर
जमीन पर गढ़ा  दिया ,
वो आयु में
मुझसे बहुत छोटी थी
फिर भी पता नहीं क्यों
उस काली पर
मेरा भी दिल आ गया
पता नहीं क्योँ उससे
मुझे अंदरूनी
प्यार सा  हो गया
जहां पर मैं  रात्रि में
शयन करता था तो
उसे भी अपनी मंझी के पास
कुछ दूरी पर बसेरा करने हेतु
सहारा दे दिया
धीरे धीरे
वो युवा होने लगी
उसकी देह भी कुछ कुछ
सुडौल और चिकनी होने लगी
ईश्वर जाने कहाँ से
उसकी चाल में भी लोच आ गया
जब वो चलती थी तो
उसकी चाल हिरणी जैसी
लगती थी
परन्तु उसका छरहरा पन
कुछ अलग ही कहानी कहता था
जब भी वो बाहर आती जाती
तो लोग उसे देखकर
आहें भरने लगे
उसके सौंदर्य की
नयी नयी कहानी
गढ़ने लगे
अब वो पूर्ण युवा हो गई
तो शादी के चर्चे होने लगे
फिर पिताश्री ने उसकी शादी
एक काले भुसण्ड
जो उसी की जाति  का था
करा दी गयी
पर उसे बिदा ना किया
बल्कि उसके पति को ही
घर से बिदा  कर दिया
जब  उसके नौ ,दस माह बाद
एक सुन्दर सा
काला काला सा
बच्चे को जन्म दिया ,
उसको इतना दूध
उतरता था की उसका वो बच्चा
और हमारे बच्चे भी उसके
सहारे पलने लगे
उस बेचारी ने
मेरे परिवार के लिये भी
बहुत से उदगार दिए
आज मैं  और मेरा परिवार
उसके ऋणी हैं
वो हम सभी के हेतु
देवी भरणी  हैं
उसका अहसान
हम कभी भूल नहीं सकते
उसका दूध ही  पीकर
मेरे बच्चे भी
आज हट्टे कट्टे 
नौ जवान हो गए हैं
और अब तो वो भी
भैंस मौसी के
मुरीद हो गए हैं ।