Monday, June 26, 2017

मैं उन दरवाजों पर टक्कर मारता रहा
जहां के बाशिंदों को चीखें भी सुनाई नहीं देती |  
मत कतरो हमारे पर
कहीं हम इंसान ना  बन जाएँ
शांति के देवदूत कहते हैं हमको
हम भी कहीं हिंसा के पुजारी न बन जाएँ
आज़ाद पंछी समझकर उड़ने दो हमें
कहीं हम क़ानून के चक्कर में फंस ना जाएँ
अभी तो सभी मुल्क हमारे अपने ही हैं
कहीं हम भी सीमाओं के चक्कर में फंस ना जाएँ| 

Saturday, June 24, 2017

बेइंतहा दौलत होने के बाद भी कोई सुखों के अम्बार नहीं लगा सकता ,
एक दुआ के मिल जाने पर ही कोई भी कभी रुस्वा हो नहीं सकता 

SOCH KA ANTAR

यदि हम परायों के साथ अपनों जैसा व्यवहार करेंगे तो कभी भी हमको नहीं भूलेंगे ,
और यदि हम अपनों के साथ परायों जैसा व्यवहार करेंगे तो वो भी हमको नहीं भूलेंगे ,
परन्तु दोनों की सोच में बहुत बड़ा अंतर है ,कभी आपने सोचा है शायद नहीं ,तो अब सोचिये

सदैव वही मनुष्य उत्तदायी होता है जो उत्तरदायित्व लेता है
उत्तरदायित्व ना लेने वाले मनुष्य तो कीड़े मकोड़ों जैसा जीवन ही जीते हैं उनको कभी भी सम्मान नहीं मिलता 
आदरणीय ,आखिर  धूर्तता की भी कोई सीमा होती है परन्तु आपने तो उसकी सम्पूर्ण  सीमाएं ही तोड़ दी ,
इसके कारण हो सकता है कि भविष्य में आपको बहुत कष्ट झेलने पड़ें ,क्योँकि मनुष्य को वही वापस मिलता है जो वो देता है | 

BHARAT SHANTI KA DEVDOOT

शांति का देवदूत
हमारा देश बहुत हीं शान्ति प्रिय है ,कहते हैं की शांति का देवदूत है ,
कहते हैं कि बहुत से देशों से शांति प्राप्ति करने हेतु लाखों सैलानी हमारे देश में पर्यटक के रूप में प्रति वर्ष  आते हैं और हम और हमारा देश उनसे करोड़ों रूपये  की विदेशी मुद्रा भी कमाते हैं ,परन्तु क्या वास्तव में हमारे देश की ऐसी स्तिथि या वास्तविकता  का यथार्थ है , जहाँ शांति ही शांति हो और आने वाले विदेशियों को वास्तव में यहाँ की शांति देखकर या महसूस करके बहुत सकून  मिलता होगा ,
मेरे विचारों में तो शायद नहीं ,
क्योँकि पिछले ३ वर्षों में देख रहा हूँ की मुझे तो कहीं भी किसी भी प्रदेश में शांति नजर नहीं आती यदि आती है तो अशांति ही अशांति ,
आज जम्मू कश्मीर ,महाराष्ट्र ,मध्य्प्रदेश ,उत्तर प्रदेश ,बिहार ,गुजरात उड़ीसा ,हरयाणा तमिल नाडु ,आंध्रा प्रदेश ,अरुणाचल प्रदेश ,बंगाल ,दार्जिलिंग कौन सा ऐसा प्रदेश  है जहां आग ना लग रही हो शोले ना भड़क रहे हों ,आखिर ऐसा कब तक चलता रहेगा क्या जब तक कि विदेशी हमारे देश को अशांति का देश ना कहेंगे या फिर जब पूरा संसार हमको अलग थलग ना कर देगा |