Thursday, December 11, 2014

किसी की मौत ,किसी का स्वाद

चलती गाडी के साथ ,उड़े जा रहा था मेरा मन
सोचा नहीं था की अगले मोड़ पर
जिंदगी की आख़िरी झलक दिखेगी ,
वैसे ही देखा खिड़की से बाहर
एक पिंजरे में कई मासूम जिंदगियां चहक रही थी
अगले क्षणों से अनभिज्ञ ,एक दुसरे से क्या गुफ्तगू कर रही थी ,
वो अनभिज्ञ थीं ,अपितु उनके पिंजरे ने मुझे जता दिया
उनकी धमनियों में बहता खून
शीघ्र ही गन्दी नालियों में बहेगा
और उनके पैरों को नौच उनका मांस बिकेगा ,
तभी मैंने देखा दो आँखें मुझे एकटक देख रही थी
कुछ कह रही थीं या पूछ रही थी मालूम नहीं
जिंदगी और मौत  के मध्य की एक झलक थी ,
क्या करू कैसे करुँ,मौत देखि नहीं
पर आज भयावह स्तिथि सामने खड़ी थी
जिंदगी निरीहों की जानी थी पर घुटन मुझे हो रही थी ,
यद्द्य्पी वो मुर्गियां थी मगर श्वास तो वो भी लेती हैं
उनके वक्ष स्थल में भी दिल है
और दर्द तो वो भी हमारी तरह ही महसूस करती हैं ,
वर्ष बीत गए उनकी आँखों में झांके पर जैसे अभी की बात है
मौत आई उनको एक बार ,प्रितिदिन ग्लानि मुझे क्योँ होती है
इस कड़वी मौत का स्वाद कोई चटखारे ले उड़ाएगा
उनकी मौत का स्वाद आज फिर किसी की महफ़िल सजाएगा |

Wednesday, November 26, 2014

हमारी पुत्रियां ही हमारा जीवन

किसी धनवान व्यक्ति के कोई संतान नहीं थी ,वो बहुत दुखी था किसी ने उसे सलाह दी की वो भूखा रहकर रात दिन सच्चे ह्रदय से ईश्वर की भक्ति करे उसकी पुकार ऊपर वाला अवश्य सुनेगा और उसने  उसी दिन से भगवन भक्ति शुरू कर दी ,कुछ दिन बाद भगवान जी प्रसन्न हुए और भक्त से कहा बेटा वार मांगो ,
उस व्यक्ति ने कहा भगवन मेरे  औलाद नहीं है कुछ बच्चे दे दो ,,भगवान ने कहा कितने बच्चे चाहिए ,उसने कहा ५ बच्चे ,भगवान बोलो ठीक है आपके घर ५ पुत्रियां पैदा होंगी ,भगवान ka इतना कहना था की वो व्यक्ति krodh में आकर मिन्नते करने लगा भगवान मुझे ५ लड़के चहिये ना कि लडकियां ,क्योँकि यदि ५ लडकियां हो गई तो मै तो जीते जी ही मर जाऊंगा ,मेरा वंश कैसे चलेग  .मेरी धन संम्पत्ति का वारिश कौन  होगा ,भगवान जी ने कहा की ठीक है पर मेरी एक शर्त है वो क्या ,,आपको ५ लड़के मिल जाएंगे परन्तु उनके साथ   एक लड़की भी साथ  लेनी पड़ेगी ,
वो व्यक्ति बोला  ,नहीं भगवान जी मैं लड़की नहीं चाहता ,क्योँकि मै अपनी  सेवा करने के लिए लड़के मांग रहा हूँ और लड़की कि सेवा और पालन पोषण भी मुझे ही करना पडेगा ,इसलिए लड़की नहीं चाहता ,भगवन जी बोले तो ठीक है मै आपको कुछ भी नहीं दे सकता ,पर एक बात अवश्य कहूँगा कि आप लाभाव  में  एक पुत्री लेकर कभी हमको याद करोगे ,इसलिए हमारी बात मान लो और ५ नहीं ये ६ बच्चे आपको दिए और भगवान जी अंतर्ध्यान हो गए ,
उस धनवान व्यक्ति के घर एक एक करके ६ बच्चे पैदा हुए और बड़े भी हो गए पांचो लड़कों ने  थोड़ी बहुत शिक्षा ली और अपने पिता जी के कार्यों में हाथ बताना शुरू कर दिया और लड़की ने ऊंछी शिक्षा प्राप्त की और बहुत बड़ी  सरकारी अफसर लग गई ,
सभी लड़कों कि शादी कर दी गई और लड़की भी शादी करके अपने घर चली गई ,लड़कों ने शादी hone के बाद से ही सभी kaam और अपने पिता कि सारी दौलत हथिया ली और बाप को एक दम लाचार कर भिखारियों जैसी हालत कर दी खुद तो कार मोटरों में घुमते और मजे करते और माँ बाप को रोटी के टुकड़ों को भी तरसा दिया ,जब वो बिलकुल असह्य हो गए तो उनको अपनी लड़की कि याद आई और भगवान जी कि कही बात भी याद आई तो उन्होंने चिट्ठी लिखकर अपनी बेटी को भेजी ,
इसी दौरान धनवान व्यक्ति को डॉक्टर्स  ने कहा कि उनकी किडनी भी खराब हो गई हैं तो उसका इलाज कराइये और किडनी बदलवाइये ,,बार बारी से वो अपने सभी पुत्रों को मिला और किडनी ठीक कराने को कहा ,तो उनके जवाब थे ,अब आपकी हमको जरूरत नहीं है ,या अब आप ज़िंदा रहकर क्या करोगे ,अब तक तो आपने खूब मजे ले लिए ,,हमारे बस्का नहीं है ,हम आपको अपनी किडनी कैसे दे सकते हैं हमारे भी तो बच्चे हैं ,जब तक ज़िंदा हो बस रोटी पानी खाते पीते रहो ,ये सारी बातें याद करके उसे भगवान कि सारी बाते याद आती थी और खुद को त्रास देते थे कि उन्होंने ये बच्चे kyoun मांगे इससे तो निसंतान ही अच्छे थे
पुत्री को जैसे ही पता चला वो बेचारी अपने बच्चों और पति सहित आ गई ,और भाइयों को खूब लानत मलानत दी परन्तु उनपर कोई असर नहीं हुआ और बोले ज्यादा दर्द है तो इन दोनों को अपने साथ ले जा ,
इतना सुनते ही लड़की अपने माँ बाप को अपने साथ ले गई और अपने घर उनकी भली भाँती दवा दारु और खाना पानी यानी कि सभी सुविधाये भरपूर देनी शुरू कि ,तो उनका स्वास्थ्य भी अच्छा हो गया और किडनी प्रॉब्लम भी सही हो गई ,और वो अपनी बेटी के घर सुखपूर्वक रहने लगे और फिर भगवान को बार बार याद करते कि यदि भगवान जबरदस्ती उनको ये बेटी ना देते तो आज उनका क्या हाल होता ,और वो ग्लानि भी महसूस करते थे ,पर कर क्या सकते थी बस भगवान जी का ही शुक्रिया अदा करते रहते थे ,अब उनकी बेटी और जमाई ने उनसे भगवन भजन करने और अपनी स्वास्थ्य का ख्याल रखने को कहा ,इस प्रकार वो सुख  से अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे ,
तो आजकल बेटों कि ख्वाइस रखने वालों के साथ ऐसा ही होता है ,अब आप सोचिये कि यदि उनके एक लड़की नहीं होती तो शायद इन महाशय को भिखारी जैसा जीवन ही यापन करते ,अभी भी लोगों ने आँखें नहीं खोली तो अंत बुरा ही होगा ,
इसलिए अब सभी को चाहिए कि भगवान जी से पुत्री अवश्य मांगे ,वरना तो जीवन नरक ही हो जाएगा 












 

Monday, August 11, 2014

सत्ता का नशा

सत्ता मिलते ही
हम उसके मद में
मस्त होकर भूल गए ,
की कभी हम
गाँव गलियारों की
गोबर मिश्रित कीचड में
रेंगने वाले कृमि थे
जिनको कि दो जून का
खाना जुटाने हेतु
दायें चलाकर आते हुए
बैलों के गोबर को उठाकर
घर ले जाना पड़ता था और
उसे धो ,साफ़ कराकर
आग पर भूनकर
फिर सत्तू बनाकर
खाना भी पड़ता था ,
पर अब तो
संसद भवन से
दस या बीस का
षटरस भोजन खाकर हम
अपनी गरीबी और
अपने गरीब भाइयों
माँ बाप ,सगे संबंधी या
जिन्होंने हमको सांसद बनाया
उन तक को भी भूल कर
हम नवाबों के नवाब बन गए |

Monday, July 14, 2014

इश्क़ का भूत

आशिक़ जंगली कबूतर
मासूक म्याऊँ होती है
शुरू के कुछ दिनों में
खूब धूप छाँव होती है
 इश्क़ का भूत उत्तर जाता है
फिर कांव कांव होती है
फिर तलाक़ फरमान होता है
या आत्महत्या निदान होती है

Wednesday, April 23, 2014

कौन बड़ा भिखारी

चुनाव का समय था एक बड़े नेता जी बड़े लाव लश्कर के साथ अपने चुनाव क्षेत्र में प्रचार करते घूम रहे थे तभी चौक पर बैठा हुआ एक भिखारी दीख गया तो उन्होंने एक सौ का नोट निकाल कर भिखारी के हाथ में पकड़ाया परन्तु उसने लेकर दूर फेंक दिया और बोला ,इतने सारे साथ लेकर चल रहा है और दिखा रहा है मात्र सौ का नोट ,,तो नेता जी बोले अरे बाबा और ले लो ,२ सौ ले लो तभी नेता जी का एक चेला बोला भाई जी इसका तो वोट भी नहीं होगा ,
भिखारी बोला वोट काहे नहीं है देख २० वोट हैं मेरे पास पूरे खानदान के ,खाली भिखारी नहीं हूँ भारत का नागरिक भी हूँ ,
पर भाई में भिखारियों से भीख नहीं लेता
तभी नेता जी बोले तुमने मुझे भिखारी कहा
और क्या कहूँ तुम तो मुझसे भी बड़े भिखारी हो ,फर्क इतना है की मै रोजाना भीख माँगता हूँ और तुम सीजनल हो ,मैं केवल जुबान से भीख माँगता हूँ और तुम लोगों के पैरों में पड  जाते हो ,तरह तरह की मुख मुद्रा बनाते हो ,झूठे प्रलोभन देते हो ,मेरे जैसे गंदे आदमी के साथ बैठकर खाना भी खा लेते हो ,कोई गाली देता है तो सुन भी लेते हो ,तुम्हारे खानदान की धज्जियां उड़ाता है तो हँसते रहते हो ,उनके गंदे गंदे बच्चों को भी गोद में लेकर खिलाने लग जाते हो ,कोई अंडे फेंकता है ,कोई टमाटर फेंकता है कोई स्याही फेंकता है कोई चप्पल और चांटा मरता हैं तो भी kuchh नहीं kahte  ,कोई तो patthar भी fek कर maar detaa है 
ये सब कोई मेरे साथ कभी करता है क्या ,
और फिर भी तुम सारे दिन एक एक वोट मांगते हुए बहेरियों की तरह भागम भाग करते रहते हो और मुझे देखो सुबह को इसी चौराहे पर आकर बैठता हूँ और शाम तक बैठा रहता हूँ ,और फिर छोटा भिखारी होने के बाद जितना कमाता हूँ शाम को पत्नी को दे देता हूँ और हिसाब लगाकर इनकम टैक्स  भी देता हूँ  कोई हेरा फेरी कोई घोटाला नहीं ,
और तुम बड़े भिखारी होने के बावजूद भी तुम्हारा पेट नहीं भरता विधान सभा या संसद में जाने के बाद भी अरबों खरबों के  घोटाले करते रहते हो ,
अब बताओ बड़ा भिखारी कौन तुम या मैं ,इसलिए मैं तुमसे भीख नहीं लूंगा










 

Saturday, March 8, 2014

महिषामर्दिनी

हे माधवी ,हे संस्कारी
हे युगपरिवर्तनकारिणी
तुमने युगों को बदला है
युग परिवर्तन हेतु
मानवों और दानवों सहित
अवतारों को भी जन्म दिया है ,
राष्ट्र कि रक्षा हेतु
सैनिकों और सिंहों को
अपनी कालजयी कोख से
कोटि बार जन्म दिया है 
और समय आने पर
हल्दीघाटी में युद्ध भी किया है ,
वीरांगनाओं  कि सेना बना
दुश्मनों से लोहा लिया है
एक एक ने चार चार को
जमींदोज तक किया है
दुश्मनों के भरी पड़ने पर
लाज बचने हेतु जौहर भी किया है ,
और आज भी प्रत्येक क्षेत्र में
देश का मार्ग प्रशस्त करने हेतु
अपनी दैवीय क्षमता का प्रयोग कर
अगर्सर होने का प्रयत्न किया है
अपने परिवार को ससक्त करने हेतु
सवयम जीवन को आहूत किया है  .|



ये कविता मैंने आज महिला दिवस के उपलक्ष्य में अपने देश कीही नहीं अपितु सम्पूर्ण संसार की नारी जाती हेतु उनकी पूर्व शौर्य ,गाथाओं और कहानियों या जो भी उन्होंने सामजिक या वीरांगनाओं के सवरूप कार्य किये किये हैं ,समर्पित करता हूँ ,धन्यवाद सहित









Thursday, March 6, 2014

नारी कि दुर्दशा

कोई नागिन सी लहराती केशवाहिनी
देखने हेतु पीछे पीछे चलता है
तो कोई सामने से आकर
मुखार बिंद पर नैन प्रहार करता है
तो कोई पीछे से धीरे धीरे चल
धक्का दे नितम्ब सपर्शका प्रयत्नकरता है
फिर कोई सम्मुख से आकर 
वक्ष  स्थल से चीरहरण कर देता है
फिर बहुत धीमी चाल से चलता हुआ
उसकी हिरनी जैसी चाल का आनंद लेता है
फिर कोई सामने आ ठिठक कर
सुराही जैसी ग्रीवा का बखान करता है
फिर कोई बराबर में कार पास सटाकर
लिफ्ट देने की करवद्ध प्रार्थना करता है
किसी प्रकार से बचते बचाते घर जाने पर
सभी घर वालों का व्याख्यान शुरू होता है